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Friday, September 22, 2017

"खतरे में आज सारे तटबन्ध हो गये हैं" (चर्चा अंक 2735)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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हिम्मत तो की होती बुलाने की 

चुन ली राह ख़ुद को तड़पाने की 
क्यों की ख़ता तूने दिल लगाने की। 
ये हसीनों की आदत होती है 
चैन चुराकर नज़रें चुराने की... 
Sahitya Surbhi पर Dilbag Virk  
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बाबुल तेरे बिन 

Tere bin पर 

Dr.NISHA MAHARANA 

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बुलेट विचार 

सुना कि बुलेट ट्रेन आने वाली है अतः इसी घोषणा के साथ बुलेट गति से उपजे विचार बुलेट पाईंट में आपकी खिदमत में पेश किये जा रहे हैं: - · बुलेट ट्रेन में एक डिब्बा मुंबई लोकल टाईप स्टैंडिंग का भी रहेगा. कुल दो घंटे की तो बात है. - · बुलेट फिल्म प्रोडक्शन के नाम से एक नई प्रोडक्शन कंपनी बनेगी जो डेढ़ घंटे की फिल्में बनायेगी सिर्फ बुलेट ट्रेन के लिए. देखना है तो यात्रा करो..पधारो म्हारे देश गुजरात में!! - · 
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भाषा में मुहावरों का तड़का 

हिंदी में तो मुहावरों की भरमार है। इसमें *मनुष्य के सर से लेकर पैर तक हर अंग के ऊपर एकाधिक मुहावरे बने हुए है। इसके अलावा खाने-पीने, आने-जाने, उठने-बैठने, सोने-जागने, रिश्ते-नातों, तीज-त्योहारों, हंसी-ख़ुशी, दुःख-तकलीफ, जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों, कथा-कहानियों, स्पष्ट-अस्पष्ट ध्वनियों, शारीरिक-प्राकृतिक या मनोवैज्ञानिक चेष्टाओं तक पर मुहावरे गढ़े गए हैं; और तो और हमने ऋषि-मुनियों-देवों तक को इनमे समाहित कर लिया है... 
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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इम्तिहान भी तय है 

न-अपमान भी तय है ,वितृष्णा भरी आँख का सामान भी तय है 
न भटकना ऐ दिल , तुझको सहना है जो वो तूफ़ान भी तय है 

न राहों से गिला , न कश्ती से शिकायत मुझको 
तूफानों के समन्दर में , मेरा इम्तिहान भी तय है... 
गीत-ग़ज़ल पर शारदा अरोरा 
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चिड़िये रँ सुख-दुख :: 

अंगिका अनुवाद : 

डॉ. अमरेन्द्र 

आज अपनी एक पुरानी कविता फ़ेसबुक पर शेयर किया हमने और कविता का सौभाग्य कि डॉ. अमरेन्द्र जी ने कविता को अंगिका में अनूदित कर दिया! इसे सहेज लें यहाँ भी ! बहुत बहुत आभार, डॉ. अमरेन्द्र जी... 
अनुशील पर अनुपमा पाठक  
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ब्लॉगिंग के 9 वर्ष ! 

आज से नौ वर्ष पहले इस विधा से परिचित हुई थी और तब शायद फेसबुक से इतनी जुडी न थी क्योंकि स्मार्ट फ़ोन नहीं थे। थे तो लेकिन मेरे पास न था और साथ ही आइआइटी की नौकरी में समय भी न था। लेकिन ऑफिस के लंच में मैं अपने ब्लॉग पर लेखन जारी रखती थी और काम उसी तरह से कुछ न कुछ चलता ही रहा। फेसबुक और ट्विटर के आने से लोगों को त्वरित कमेंट और प्रतिक्रिया आती थी और लोगों को वह अधिक भा गया ... 
मेरा सरोकार पर रेखा श्रीवास्तव 
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बहुरंगी हाइकू 

माता की कृपा 
रहती सदा साथ 
मेरी रक्षक 

स्पर्श माता का 
बचपन लौटाता 
यादें सजाता...  
Akanksha पर Asha Saxena  
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Wednesday, September 20, 2017

बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर : चर्चामंच 2733

"कुछ कहना है"

मुक्तक- 

बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर ।
अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।
कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर-
सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष बढ़-चढ़ कर।। 

राजनीति में न तो कोई स्थायी मित्र होता है 

और न ही स्थायी दुश्मन 

haresh Kumar 

मंत्री जी! ज़बान संभाल के... 

pramod joshi 

''दीवार में आले'' का लोकार्पण वक्तव्य : 

ऋषभदेव शर्मा 

कौन से घटक (कारक )बनते हैं 

अल्जाइमर्स रोग की वजह। 

Virendra Kumar Sharma 

खोई हुई पहचान हूँ मैं... 

राजेश रेड्डी 

yashoda Agrawal 

दोहे 

"एकल कवितापाठ" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 


Tuesday, September 19, 2017

सुबह से ही मगर घरपर, बड़ी सी भीड़ है घेरी-चर्चामंच 2732


सुबह से ही मगर घरपर, बड़ी सी भीड़ है घेरी- 

; रविकर 
मिली मदमस्त महबूबा मुझे मंजिल मिली मेरी।
दगा फिर जिन्दगी देती, खुदारा आज मुँहफेरी।

कभी भी दो घरी कोई नहीं यूँ पास में बैठा

सुबह से ही मगर घरपर, बड़ी सी भीड़ है घेरी।

अभी तक तो किसी ने भी नहीं कोई दिया तोह्फा।

मगर अब फूल माला की लगाई पास में ढेरी।

तरसते हाथ थे मेरे किसी ने भी नहीं थामा

बदलते लोग कंधे यूँ कहीं हो जाय ना देरी।

कदम दो चार भी कोई नही था साथ में चलता

मगर अब काफिला पीछे, हुई रविकर कृपा तेरी।।

किताबों की दुनिया -143 

नीरज गोस्वामी 

न रखना अब वास्ता 

Priti Surana 

मिलते हैं मेरे जैसे, किरदार कथाओं में ... 

Digamber Naswa 

अफसरी से बाहर आओ अल्फोंस साहब 

Lokendra Singh 

एक सोच 

Rewa tibrewal 

दस्तक देते कईं शब्द मेरे.....रश्मि वर्मा 

yashoda Agrawal 

कब निकलेगा कश्मीर वार्ता का हल 

विकेश कुमार बडोला 

इतना दिखा कर उसको ना पकाया करो 

कभी खुद को भी अपने साथ लाया करो 

सुशील कुमार जोशी 

बलात्कार कब तक होते रहेंगे माँ ? 

डॉ. कौशलेन्द्रम 

बाइक यात्रा: 

नारायण आश्रम से मुन्स्यारी 

नीरज जाट 

गीत  

"माया की झप्पी" 

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 


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