समर्थक

Wednesday, August 30, 2017

"गम है उसको भुला रहे हैं" (चर्चा अंक-2712)


विधाता छंद 

रविकर 
यहाँ आनंद आभासी मगर हर व्यक्ति चाहे है।
दुखों का है गहन अनुभव हृदय रविकर कराहे है।
मिलेगी जिंदगी में कामयाबी किन्तु उसको ही-


जिसे विश्वास खुद पर, जो लिए मजबूत बाँहे है।।

गुरु: उच्च का नहीं....... 

विष्णु बैरागी  

बिद्रूप चेहरे 

पुरुषोत्तम पाण्डेय 
 जाले -  

मखमल जैसी वीर बहूटी----। 

डा0 हेमंत कुमार  

पाती प्रेम की 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 

वह लबों पर थी ग़ज़ल सी आई  

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’  

पति परमेश्वर  

(लघु कथा) 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi  

हथेलियों पर चाँद !!  

तिश्नगी पर आशीष नैथाऩी 

Tuesday, August 29, 2017

कई सरकार खूंटी पर, रखी थी टांग डेरे में-: चर्चामंच 2711


कई सरकार खूंटी पर, रखी थी टांग डेरे में- 
रविकर 
कई सरकार खूंटी पर, रखी थी टांग डेरे में।
अधिकतर भक्त दुर्जन के रहे अबतक अंधेरे में।
जयतु जय जांच अधिकारी, अदालत की सदा जय जय
चमत्कारी बलात्कारी पड़ा है आज फेरे में।

माँ सामने खड़ी है मचल जाइए हुजूर ... 

बहरों का है शहर ये संभल जाइए हुजूर 
क्यों कह रहे हैं अपनी गज़ल जाइए हुजूर... 
स्वप्न मेरे ...पर Digamber Naswa 


बादल राजा 

(बरसात पर 10 हाइकु) 

1. 
ओ मेघ राजा 
अब तो बरस जा 
भगा दे गर्मी! 
2. 
बदली रानी 
झूम-झूम बरसी 
नाचती गाती! 
3. ... 
लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम 

किताबों की दुनिया - 140 

नीरज गोस्वामी 



जिन्दगी और पत्थर 

देखा है उनको निर्जीव हाथी को पूजते हुये। 
देखा था कल हाथी को महावत से जूझते हुये... 
कविता मंच पर Himanshu Mittra  


पति परमेश्वर 

सोनू आज तुमने फिर आने में देर कर दी ,देखो सारे बर्तन जूठे पड़ें है ,सारा घर फैला पड़ा है ,कितना काम है ।''मीना ने सोनू के घर के अंदर दाखिल होते ही बोलना शुरू कर दिया ,लेकिन सोनू चुपचाप आँखे झुकाए किचेन में जा कर बर्तन मांजने लगी ,तभी मीना ने उसके मुख की ओर ध्यान से देखा ,उसका पूरा मुहं सूज रहा था ,उसकी बाहों और गर्दन पर भी लाल नीले निशान साफ़ दिखाई दे रहे थे । ''आज फिर अपने आदमी से पिट कर आई है ''... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 






बड़े आराम से यह कहा जा सकता है कि लालू मुलायम मायावती से लेकर जातिवादी राजनीति करते अपनी व्यक्तिगत दुकान चलाने वाले आरक्षण पैरोकारों से लेकर नवोदित "हार्दिक पटेल" जैसे लोगों तक की रैलियों में जो विशाल भीड़ उमड़ती है,वह भाड़े की होती है...  
संवेदना संसार पर रंजना  

चुप की छाया 

रश्मि शर्मा 


Monday, August 28, 2017

"कैसा सिलसिला है" (चर्चा अंक 2710)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

--

ये कैसा सिलसिला है.... 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी  
--
--
--

Who owns the INTERNET ? 

इंटरनेट का मालिक कौन ? 

तो इन सवाल का जबाब साफ है इंटरनेट पर किसी का अधिकार नहीं है यानि इंटरनेट का मालिक कोई नहीं सब एक दूसरे के सहयोग से आप तक इंटरनेट सेवा पहुॅचाते हैं, इसी में सबका फायदा है... 
--

धुंध 

Sudhinama पर sadhana vaid 
--

ब्लॉगिंग की दुनिया में वापसी 

प्रिय पाठकों , सन 2011 नवम्बर में मैंने ब्लॉगिंग करना बंद कर दिया था अब पूरे 6 साल बाद मैं अपने ब्लॉग *नन्हीं कोपल* को नये सिरे से शुरू करने जा रही हूँ । इन बीते हुए सालों में मैंने एम .एससी (ह्यूमन डेवेलपमेंट) बी.एड ,पीजीडीसीए की डिग्री प्राप्त की है । मैं अपने लेखनी के माध्यम से पाठकों को ऐसी जानकारियां देना चाहती हूँ जो सभी पाठकगण के लिए उपयोगी व ज्ञानवर्धक हो , आशा है सभी पाठकों को यह प्रयास पसंद आयेगा । *कोपल कोकास* 
नन्ही कोपल पर कोपल कोकास 
--
--

सिर्फ गर्दन हमारी है - 

मुशिफ भी तुम्हारा है वजीर भी तुम्हारा है
शमशीर भी तुम्हारी है सिर्फ गर्दन हमारी है -
खेल भी तुम्हारा है खिलाड़ी भी तुम्हारे हैं
पत्ते भी तुम्हारे हैं सिर्फ हार ही हमारी है -
मुल्क भी हमारा है ये मिट्टी भी हमारी है
अमन के सिपाही हैं ये किस्मत तुम्हारी है 
udaya veer singh 
--
--

(व्यंग्य रचना)  

वाह रे मैं ...! 

लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी महत्वपूर्ण ओहदे को प्राप्त करते हैं , पदोन्नत हो जाते हैं , कोई नई कुर्सी मिल जाती है , किसी ने अपने लेटरपैड के पन्ने पर किसी को किसी संस्था का पदाधिकारी बना दिया , बिल्ली के भाग्य से कोई ईनाम किसी की झोली में टपक पड़ा , तो ऐसे स्वयंभू महान लोग अपने फोटो के साथ अख़बारों में अपनी तारीफ़ खुद छपवाते हैं... 
मेरे दिल की बात पर Swarajya karun 
--

मेरी सोनचिरैया 

चिड़िया दिन भर आँगन में चहकती 
यहाँ वहाँ टहनियों पे 
अपना डेरा जमाती 
कुछ दिनों में नज़र न आती 
पर शायद उसका स्थान 
मेरी बेटी ने ले लिया है 
जब से उसने पायल पहनी 
ठुमक ठुमक के चलती ... 
Akanksha पर Asha Saxena 
--
--

भ्रष्ट वो जिसकी कलई खुल गई है.. 

सबसे पहले उनसे क्षमायाचना जो सचमुच के बाबा हैं. वो इस आलेख के सिलेबस में नहीं हैं. वैसे इतना कहकर अगर इनसे हाथ खड़े करवाये जायें कि बताओ कौन कौन इसके सिलेबस में नहीं हैं तो सभी बाबा हाथ खड़े कर देंगे मगर अगर इनके कर्मों से हाथ उठवाया जाये तो सारे सिलेबस में ही नजर आयेंगे. तो सचमुच के बाबाओं को छोड़ कर बाकी के बचे बाबा दो प्रकार के होते हैं. एक तो वो जिनका पर्दाफाश हो चुका है और दूसरे वो जिनका पर्दाफाश अभी नहीं हुआ है. ठीक वैसे ही जैसे हम नेताओं और अधिकारियों को भ्रष्ट और ईमानदार की श्रेणी में रखते हैं, यहाँ भी सिलेबस के बाहर वाले अपवाद हो सकते हैं, मगर फिर भी, भ्रष्ट वो जिसकी कलई खुल गयी... 
--

'बेअकल लड़की ' :  

कहानी (1) -  

रचना भोला 'यामिनी' 

आदरणीया रचना जी एक बेहद सक्रिय जीवन उल्लास में रची-पगी लेखिका हैं l फेसबुक पर आपके लिखे 'लव नोट्स' धूम मचाये हुए हैं और अभी हाल के जागरण बेस्टसेलर में आपका एक अनुवाद जगह बनाये हुए है l नवोत्पल के लिए आपने चार कहानियां सप्रेम भेजी हैं, इस कड़ी में यह पहली कहानी है l यह कहानी कितनी रियल है और कैसे यह कुछ अब्सट्रैक्ट से समझे जाने वाले पलों की महत्ता उकेरती है, यह देखते ही बनता है... 
नवोत्पल पर Shreesh K. Pathak  

LinkWithin