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Thursday, March 31, 2016

चर्चा - 2298

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है
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धन्यवाद 

Wednesday, March 30, 2016

"ईर्ष्या और लालसा शांत नहीं होती है" (चर्चा अंक - 2297)

मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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तुम कैसे हो इससे इनको क्या लेना 

मुर्दाघर की रौशन दुनिया कर देंगे  
तुम जागे तो मुर्दे हत्या कर देंगे... 
Sanjay Grover 
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बेमौत मरते सैनिक और फर्ज़ी राष्ट्रवाद 

जितने सैनिक हर साल आतंकवादियों से लड़कर नहीं मरते, उससे ज्यादा आत्महत्या कर मरते हैं 2000 से 2012 के बीच 12 साल में 3987 सैनिक मारे गए, जबकि, इस दौरान हमने युद्ध एक भी नहीं लड़ा। 2004-13 के दस सालों में खेत में अनाज उगाने में लगे – 1,58,865 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए। जम्मू कश्मीर में 2013 में, 24 जवानों ने आत्महत्या की, वहीं 15 जवान आतंकवादियों से मुठभेड़ में मारे गए .....जरूर पढ़ें पूरा लेख... 
रांचीहल्ला पर Amalendu Upadhyaya 
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आई हेट यू परमिला जी -  

असितकुमार मिश्र 

कहानी असितकुमार मिश्र जी के ब्लॉग   
" कोहबर  " से - 
मेरे मन की पर अर्चना चावजी  
Archana Chaoji 
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घर परिवार में उलझी स्त्री 

प्रेम में आ कर सुलझती है 

ग़ज़ल 

बहकती है दुनिया लेकिन वह नदी की तरह बहती है 
घर परिवार में उलझी स्त्री प्रेम में आ कर सुलझती है 

सरे राह दौड़ कर आना चने का साग खोंट कर खाना 
बचपन की रेल अकसर तुम्हारे साथ यादों में गुज़रती है ... 
सरोकारनामा पर Dayanand Pandey 
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समीक्षा-पूर्णिमा वर्मन 

कल्पना रामानी जी इंटरनेट और वेब का एक जीता जागता चमत्कार हैं। अगर इंटरनेट न होता तो हम इस चमत्कार से वंचित रह जाते। एक ऐसा चमत्कार जो देखते ही देखते एक सामान्य गृहणी को जानी-मानी रचनाकार के रूप में हम सबके प्रकट कर दे... 

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी पर 

कल्पना रामानी 

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दिल का निज़ाम 

दिल का निज़ाम रोज़ बदलता चला गया 
हाथों से मेरे वक़्त फिसलता चला गया... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil 
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पाक दामन 

चेत सिंह और सचेत सिंह दोनों सगे भाई अपने पिंड लावलपुर बैसाखी की खुशियों पर घर आए हैं , भरा पूरा दोनों का परिवार है दोनों के दो दो बच्चे जो स्कूली शिक्षा में हैं चेत सिंह कश्मीर में सरहद पर तैनात हैं। और सचेत सिंह नागरिक पुलिस में जो वर्तमान में जिला फगवाड़ा में एक चेक पोस्ट पर तैनात हैं... 
udaya veer singh 
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"Beauty' by John Masefield  

-कविता का हिन्दी अनुवाद” 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

मैं ईश्वर से
पूछता हूँ
सौन्दर्य क्या है?
तो मौन में से
उत्तर आता है-
प्रेयसी के बाल,
उसकी आँखें,
उसके ओंठ,
और उनसे निकली
मधुर ध्वनि
यही तो 
सबसे बड़ा सौन्दर्य है!... 

Tuesday, March 29, 2016

"सूरज तो सबकी छत पर है" (चर्चा अंक - 2296)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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सूरज तो सबकी छत पर है 

चाहो तुम  घर अंधेरा रखो
सूरज तो सबकी छत पर है-
तुम चाहो तो नीर विहीन रहो
कब सून्य धरा जल निर्झर है... 
udaya veer singh 
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आदिम सभ्यताओं से गुजरते हुये! 

अंजुमन पर  डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'  
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वोट बैंक 

मर गया? मर जाने दो, 
सके दर से वोट बैंक का रास्ता नहीं गुजरता, 
सियासत गर्म होने दो, आम आदमी उबलने दो, 
कि सियासत मरने वाले का वर्ग देखती है,.. 
daideeptya पर Anil kumar Singh  
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अस्पताल के उस कमरे 

एक छुअन की याद *योगेंद्र आहूजा * पिछले कुछ बरसों में कर्इ बार ऐसा हुआ कि वीरेन जी को मिलने देखने अलग अलग अस्पतालों मेें जाना पड़ा, शीशों के पीछे दूर से ही देखकर वापस आना पड़ा । एक अस्पताल में उनके साथ, उनके बेड के करीब काउच पर दो रातें भी बितार्इं । फिर भी मुझे कभी यकीन नहीं हुआ कि वह शख्स किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है या हो सकता है... 
लिखो यहां वहां पर विजय गौड़ 
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तेरा जीवन 

तूने अपना जीवन यदि, 
शब्दों में डाला, निष्फल है । 
जीवन तो तेरा वह होगा, 
जो शब्दों की उत्पत्ति बने... 
प्रवीण पाण्डेय 
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Tut Ankh Amun Official FULL MOVIE Censor Copy 

(By Yash Tiwari) 

आज से लगभग साल भर पहले मेरे बेटे यश ने सत्ताइस मिनिट की एक शार्ट मूवी ' TUTANKHAMUN,' बनाई थी , किसी की मदद लिए बगैर . .इसका टीज़र और ट्रेलर मैं पहले ही यहां दिखा चुकी हूँ , इसमें कुछ कमियां भी नज़र आएंगीं , आवाज़ शुरुआत के कुछ दृश्यों में अस्पष्ट और धीमी है , जो बाद में ठीक हो जाएगी। मैं चाहती हूँ की तेरह वर्ष की उम्र के बच्चे की इस कोशिश को आप ज़रूर देखें। ... 
प्रियदर्शिनी तिवारी  
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खामोश 

वो तो सुनता है मगर ,खामोश रह जाता है  
इम्तेहान -ऐ -ज़ीस्त में कब होश रह जाता है ?  
कोई हुजूम आया नहीं ,अब कर रहे क्यों गिला 
अाप खुद से न मिले,क्या दोष रह जाता है ? 
किस तरह से ज़मीं ठण्ड से बातें करे 
और गवाह में किस तरह बस ओस रह जाता है... 
कविता-एक कोशिश पर नीलांश 
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किताबों की दुनिया -121 

नीरज पर नीरज गोस्वामी 
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बावरे फकीरा को सात साल पूरे हुए 

गिरीश बिल्लोरे मुकुल 
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आज खालीपन मेरा पूरा भरा है ॥ 
अब कहीं पीला नहीं है बस हरा है ॥ 
जिसपे मैं क़ुर्बान था आग़ाज़ से ही ,  
वह भी आखिरकार मुझ पर आ मरा है ... 
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ये दुनिया  

(ग़ज़ल) 

हर रोज़ सबक सिखाती है ये दुनिया  
सताए हुए को और सताती है ये दुनिया... 
कविता मंच पर Hitesh Sharma 
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धोनी ,विराट {दोहावली } 

भारत की इस टीम केे,क्या कहने क्या ठाट। 
सचिन विरासत दे गए,धोनी और विराट... 
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया  

"राम तुम बन जाओगे" (चर्चा अंक-2821)

मित्रों! सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...