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Thursday, July 31, 2014

ओ काले मेघा { चर्चा - 1691 }

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है 
चर्चा लगाते समय पता चला कि चर्चा मंच के व्यवस्थापक आदरणीय रूप चन्द्र शास्त्री जी के पूज्य पिता जी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर परलोक सिधार गए हैं | चर्चा मंच परिवार उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता है |
आज हरियाली तीज है लेकिन बिना बारिश के यह अर्थहीन लगी | कुछ दिन पहले हल्की बूँदा - बाँदी हुई तो आस बंधी कि अब तो बारिश शरू हो जाएगी लेकिन काले बादल उमड़ते तो हैं लेकिन बरसते नही, जन-जन बारिश को तरस रहा है और पुकार रहा है ओ काले मेघा बरसो छमाछम |लेकिन मेघा तो ठहरे मर्जी के मालिक |
चलते हैं चर्चा की ओर 
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आभार 

Wednesday, July 30, 2014

साया बापू का उठा, *रूप-चन्द ग़मगीन :चर्चा मंच 1690

" दुखद समाचार" 

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक के

 पिताश्री श्रद्धेय घासीराम आर्य जी का देहावसान

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 
रविकर 
 साया बापू का उठा, *रूप-चन्द ग़मगीन । 
हैं अर्पित श्रद्धा-सुमन, आत्मा स्वर्गासीन । 

आत्मा स्वर्गासीन, शान्ति से वहाँ विराजे । 
सहे दर्द परिवार, आज पाये जो ताजे । 

कह रविकर कविराय, पिता ने सब कुछ पाया । 
सदा रहें वे साथ, मात्र यह बदन नसाया ॥ 


Kunwar Kusumesh
Deepak Saini
HARSHVARDHAN

ईदHARSHVARDHAN TRIPATHI 


vandana gupta 



Asha Saxena 

ऋता शेखर मधु


pramod joshi 

Prerna Argal
chandan bhati


yashoda agrawal 



Misra Raahul 

ZEAL
ZEAL 
Dr.NISHA MAHARANA


Brijesh Neeraj 



रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 


चाँद दिखाई दिया दूज का,
फिर से रात हुई उजियाली।
हरी घास का बिछा गलीचा,
तीज आ गई है हरियाली।।

भर सोलह सिंगार धरा ने,
फिर से अपना रूप निखारा।
सजनी ने साजन की खातिर,
सावन में तन-बदन सँवारा।
वन-कानन में आज मयूरी,
नाच रही होकर मतवाली।
हरी घास का बिछा गलीचा,
तीज आ गई है हरियाली।।

आँगन के कट गये पेड़ सब,
पड़े हुए झूले घर-घर में।
झूल रहीं खुश हो बालाएँ,
गूँज रहे मल्हार नगर में।
मस्त फुहारें लेकर आयी,
नभ पर छाई बदरी काली।।
हरी घास का बिछा गलीचा,
तीज आ गई है हरियाली।।

उपवन में कोमल कलियों की,
भीग रही है चूनर धानी।
खेतों में लहराते बिरुए,
आसमान का पीते पानी।
पुरवय्या के झोंखे आते,
बल खाती पेड़ों की डाली।।
हरी घास का बिछा गलीचा,
तीज आ गई है हरियाली।।

घेवर-फेनी और जलेबी,
अच्छी लगती चौमासे में।
लेकिन अब त्यौहार हमारे,
हैं मँहगाई के फाँसे में।
खास आदमी मजे उड़ाते,
जेब आम की बिल्कुल खाली।।
हरी घास का बिछा गलीचा,
तीज आ गई है हरियाली।।
 
शर्माया-सकुचाया सा,
उग आया चाँद गगन में।
आया है त्यौहार ईद का,
हर्ष समाया मन में।
इस्लामी लोगों के घर में
चल कर आयी दीवाली।
हरी घास का बिछा गलीचा,
तीज आ गई है हरियाली।।


Tuesday, July 29, 2014

"आओ सहेजें धरा को" (चर्चा मंच 1689)

सभी को ईद मुबारक के साथ ही 

हरियाली तीज की शुभकामनायें

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! कौशल ! पर Shalini Kaushik
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हो मुबारक ईद की शाम 

मीठी सेवइयां ढेरों मिठाइयां 
भर जाये जीवन में खुशियां 
मिट जाये सब मैल तमाम 
हो मुबारक ईद की शाम ..... 
आओ सहेजें धरा को
Chaitanyaa Sharma 


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भारतीय मुसलमान का एक सपना : 

आज जब नींद खुली अचानक सब कुछ बदला बदला सा था, कानो में आँ आँ आँ अलाह आअ हु अकबर की मधुर ध्वनी कानो में टकराई, पर किसी मंदिर या गुरुद्वारा की बेसुरी आवाज गायब थी. ये देख कर मैंने नारा लगाया, तारा ये तकबीर अल्लाह हु अकबर...
नारद पर कमल कुमार सिंह (नारद )

"मौन निमन्त्रण" 


आँखों के मौन निमन्त्रण से,
बिन डोर खिचें सब आते हैं।
मुद्दत से टूटे रिश्ते भी,
सम्बन्धों में बंध जाते हैं...

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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प्राकृतिक चूने पत्थर की गुफाऐं , 
बारातांग , अंडमान
Manu Tyagi 

नीरज गोस्वामी 

चन्द माहिया : क़िस्त 05 

:1: जब बात निकल जाती 
लाख करो कोशिश 
फिर लौट के कब आती  
:2: यारब ! ये अदा कैसी ? 
ख़ुद से छुपते हैं 
देखी न सुनी ऐसी...
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक
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इन्तहा इंतज़ार की
Prerna Argal 

आधा हिस्सा पीहर में 

हाँ,आज भी टूट जाता है घर आँगन अंदर तक जब बेटी विदा होती है. अपनी ससुराल जाकर भी अपना आधा हिस्सा छोड़ जाती है पीहर में...
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युद्ध
Prabodh Kumar Govil 

कड़वी दवा न दें, साहब ! 

नफ़स-नफ़स में हमें बद्दुआ न दें साहब 
क़दम-क़दम पे नया मुद्द'आ न दें साहब 
हमारे रिज़्क़ पे सरमाएदार क़ाबिज़ हैं 
कि मर्ज़े-भूख में कड़वी दवा न दें साहब...
Suresh Swapni

"चाय हमारे मन को भाई" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 परदेशों से चलकर आई।
चाय हमारे मन को भाई।।
कैसे जुड़ा चाय से नाता,
मैं इसका इतिहास बताता,
शुरू-शुरू में इसकी प्याली,
गोरों ने थी मुफ्त पिलाई।
चाय हमारे मन को भाई।।

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