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Wednesday, July 31, 2013

कीचड़ तो तैयार, मगर क्या कमल खिलेंगे-- चर्चा मंच 1323


 गुरुवर का आदेश, देश की हालत जाँचो -
करता चर्चा पेश, पाठकों प्रियवर बाँचो -


"माँ शारदा वंदन" (श्यामा अरोरा)


अम्ब शारदे वंदन तेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 

दर पर आये है हम भिखारी 
पूरी कर दो आशा हमारी 
सुन लो करुण यह क्रंदन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा

माँ मुझको वीणा का स्वर दो 
मेरा राग अमर माँ कर दो 
मस्तक कर दो चन्दन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा



गीत तुम्हारे लिखती जाऊ 
मईया तुमसे यह वर पाऊ 
खिला  रहे मन नंदन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा

उर में मेरे भाव समा दो 
श्वास श्वास में सुर बिखरा दो 
कहे ह्रदय स्पंदन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा

सरिता भाटिया 

" तस्वीरें बोलती हैं "...........!!!!

PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.) 


pankhuri goel 

ईमान- नेताओं मे

Ghotoo 



रविकर 


कल्पना की लहरें .....


Yashwant Mathur 



चिट्ठियों से हुई चित्रा मुद्गल के लेखन की शुरूआत


Krishna Kumar Yadav 



सीधे सीधे बता पागल मन बना !

सुशील 


दिले नादान को बहला रहा हूँ

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu"  


Kailash Sharma 

परिवर्तन...


Pallavi saxena 



यही उपकार काफी है कि अब उपकार मत करना


Manoj Nautiyal 



भूल गया रोने के लिए अलग एक कमरा रखना..........निधि मेहरोत्रा


yashoda agrawal 



परछाइयाँ कब हुई अपनी ........


उपासना सियाग 



गृहणी

Rewa tibrewal


बच्चों की शिक्षा और हरिलाल गांधी


मनोज कुमार 



सच्चाई की हार, वोट कुछ दल ने जोड़े-


अखिलेश सरकार अपनी विफलताओं को तुष्टिकरण की आड़ में छुपाना चाहती है !!

पूरण खण्डेलवाल

 फलता है हर फैसला, फैला कारोबार |
अधिकारी का हौंसला, तोड़े बारम्बार |
तोड़े बारम्बार, शक्ति दुर्गा की तोड़े |
सच्चाई की हार, वोट कुछ दल ने जोड़े |
छलता सत्ता-असुर, सिंह रह गया उछलता |
हुवा फेल अखिलेश, छुपाता सतत विफलता |

बनाने वाले ने हमें भी अगर, ऐसा ऐ काश बनाया होता

पी.सी.गोदियाल "परचेत" 
खोजो शाला इक बड़ी, पढ़ते जहाँ अमीर  |
मनचाहा साथी चुनो, सुन राँझे इक हीर |

सुन राँझे इक हीर, चीर कर दिखा कलेजा |
सुना घरेलू पीर, रोज खा उसका भेजा |

प्रथम पुरुष को पाय, लगाए दिल वह बाला |
समय गया पर बीत, पुत्र हित खोजो शाला ||


कीचड़ तो तैयार, मगर क्या कमल खिलेंगे-

कमल खिलेंगे बहुत पर, राहु-केतु हैं बंकु |
चौदह के चौपाल  की, है उम्मीद त्रिशंकु |

है उम्मीद त्रिशंकु, भानुमति खोल पिटारा |
करे रोज इफ्तार, धर्म-निरपेक्षी नारा |

ले "मकार" को साध, कुशासन फिर से देंगे |
कीचड़ तो तैयार, 
मगर क्या कमल खिलेंगे--
*Minority
*Muthuvel-Karunanidhi 
*Mulaayam
*Maayaa
*Mamta 

अपना ही दामाद, क्लीन चिट छापे अप्पा-

गट्टा पकड़े जाँच-दल, पर पट्ठा की ट्रिक्स |
मैच फिक्स करता रहा, करे जाँच अब फिक्स |  

करे जाँच अब फिक्स, बड़े दाउद का बप्पा |
अपना ही दामाद, क्लीन चिट छापे अप्पा |

बी सी सी आई राज, लगा इज्जत पर बट्टा |
अपने क्लब पर नाज, छुड़ा के भागे गट्टा ||

 मयंक का कोना 
"कुछ अद्यतन लिंक"
गाथा हिंदुस्तान
आपका ब्लॉग


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(एक अगस्त से हरि गीतिका छन्द का प्रारम्भ हो जायेगा)
सृजन मंच ऑनलाइन
सृजन मंच ऑनलाइन

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"तितली रानी"
मन को बहुत लुभाने वाली,
तितली रानी कितनी सुन्दर।
भरा हुआ इसके पंखों में,
रंगों का है एक समन्दर।।
नन्हे सुमन
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"जाम ढलने लगे" 

हो रहा सब जगहधन से धन का मिलन
रो रहा हर जगहभाई-चारा अमन,  
नाम है आचमनजाम ढलने लगे।  
करते-करते यजनहाथ जलने लगे।। 
उच्चारण

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आख़िर मैंने चान (चाँद) लिख दिया
ग़ाफ़िल की अमानत
आख़िर मैंने चान (चाँद) लिख दिया। 
सागर में तूफ़ान लिख दिया...
ग़ाफ़िल की अमानत पर चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल

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कौन टाइप के हो समीर भाई

जनम दिन मुबारक हो समीर भाई...!
नुक्कड़ पर Girish Billore
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जिसकी नहीं कदर यहाँ पर ,ऐसी वो बेजान यहाँ है .

! कौशल ! पर Shalini Kaushik

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कार्टून:- लो, और बना लो तेलंगाना

काजल कुमार के कार्टून

Tuesday, July 30, 2013

"शम्मा सारी रात जली" (चर्चा मंच-अंकः1322)

मित्रों!
      मंगलवार की चर्चाकार बहन राजेश कुमारी जी एक माह के लिए कश्मीर प्रवास पर गयी हुई हैं। अतः चार सप्ताह तक हर मंगलवार को आप मेरी पसंद के लिंक देखेंगे।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।
बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।
'सतसईया' का दोहा हो या,  'पदमावत'चौपाई हो ?
या बच्चन की 'मधुशाला'की,सबसे श्रेष्ठ रुबाई हो ?
आपका ब्लॉग पर DrRaaj saksena 
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कर्कश सुर से तो होती है, खामोशी की तान भली
जल जाता शैतान पतिंगा, शम्मा सारी रात जली
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रजनी निज मन को व्यथित कर;
थिर अन्तस् को स्वर प्लावित कर 
मानो 
निश्छल प्राण छले गये !
अन्तर्गगन पर धीरेन्द्र अस्थाना
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मिट्टी से लिपा चुल्हा चुल्हे में सुलगती लकड़ियाँ 
उसकी आँच में सिकी हुई माँ के हाथों की गरम रोटियाँ 
बहुत याद आते हैं....

अभिव्यंजना पर Maheshwari kaneri

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सभी को दिखाई दे जाते हैं रोज कहीं ना कहीं कुछ मोर उनके अपने जंगलों में नाचते हुऎ सब लेकिन कहाँ बताते है किसी और को जंगल में मोर नाचा था और उन्होने उसे नाचते हुए देखा था ...

उल्लूक टाईम्स पर सुशील

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डायरी के पन्ने ....जो कहानी संग्रह के रूप में लिखे जा रहें हैं ....उसे कुछ हिस्से साथ साथ यहाँ ब्लॉग पर आप सबके साथ साँझा कर रही हूँ ....

अपनों का साथ पर Anju (Anu) Chaudhary

--
चुनाव अब धीरे धीरे करीब आ रहे हैं और सब अपनी छवि के लिए राजनैतिक समीकरण जिस तेजी से पूरे देश को उद्वेलित कर रहे हें लगता है कि सारे दलों के लोग अब बिल्कुल दूध के धुले होकर हमारी (जनता) की शरण में आने वाले हें लेकिन दलों की नीतियां भी तो देख लीजे फिर विश्वास कीजिये...

hindigen पर रेखा श्रीवास्तव 

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जिसे अपना बनाए जा रहा हूँ, 
उसी से चोट दिल पे खा रहा हूँ, 
यकीं मुझपे करेगी या नहीं वो, 
अभी मैं आजमाया जा रहा हूँ,....
मेरी धरोहर पर yashoda agrawal
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चलिए, आज हम आपको तिथियों के बहाने सूरज और चंदा की प्रेम कहानी सुनाते हैं। पर ये प्रेम कहानी बाकी कहानियों से अलग है। जहाँ अन्य सभी प्रेमी-युगल मिलन की बाट जोहते रहते हैं, वहीं हमारी चंदा रानी सूरज से मिलन होते ही एकदम काली पड़ जाती हैं....

आह्वान पर  डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'

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छिटपुट साहित्य लेखन की आदत तो बचपन से ही थी किन्तु, सन २००८ में लगभग इसी वक्त मैंने अपना यह ब्लॉग लिखना शुरू किया था। शुरुआती समय में पद्य की जगह गद्य लेखन पर अधिक जोर था, और ज्वलंत समसामयिक मुद्दों पर खूब लिखता था...

अंधड़ ! पर  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

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सृजन मंच ऑनलाइन

मित्रों!
आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।
कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। आपका मेल मिलते ही आपको सृजन मंच ऑनलाइन के लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!
--
छहों ऋतुएं मोहे ना भायी सखी री जब तक ना हो पी से मिलन सखी री विरही मौसम ने डाला है डेरा कृष्ण बिना सब जग है सूना जब हो प्रीतम का दर्शन तब जानूं आया है सावन ये कैसा....

एक प्रयास पर vandana gupta 

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 प्यास मेरी अधूरी यही रह गई 
आशियाने बहे ना डगर ही मिली 
सूचना आसमानी धरी रह गई ...

गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 

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उस खाली पड़े कैनवास पर हर रोज सोचता हूँ 
एक तस्वीर उकेरूँ कुछ ऐसे रंग भरूँ 
जो अद्वितीय हो पर कौन सी तस्वीर बनाऊँ 
जो हो अलग सबसे हटकर अद्वितीय और अनोखी 
इसी सोच में बस गुम हो जाता हूँ....

मन का पंछी पर शिवनाथ कुमार

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यूँ ना इस अंदाज़ में हमको देखा करो 
मुहब्बत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे 
ये शोख अदाएं अक्सर बहकाती हैं दिल को ...

आपका ब्लॉग पर yashoda agrawal

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संगम पर बाप आकर बच्चों को ऊंचे ते ऊंचा कर्म कैसे किया जाए ,समझाते हैं। अ-कर्म जिनका आगे हिसाब किताब नहीं बनता करने की विधि समझाते हैं। अब हम बच्चों को उसे एक मेथड एक प्रोद्योगिकी में खुद ही बदलना है निरंतर प्रयत्न से पुरुषार्थ से।कर्म और योग का संतुलन बनाए रखना है...


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क्या ज़मीं क्या अस्मां न किसी पर भरोसा कीजे 
चंद लमहात में सारा ज़माना बदल जाता है 
वो तो फ़कत फ़ितरत है उसकी फ़ितरत है बदलना 
आजकल इन्सान क्या ख़ुदा भी बदल जाता है...

Zindagi se muthbhed पर Aziz Jaunpuri

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माता के शुभ चरण छू, छू-मंतर हों कष्ट | 
जिभ्या पर मिसरी घुले, भाव कथ्य सुस्पस्ट |
भाव कथ्य सुस्पस्ट, अष्ट-गुण अष्ट सिद्धियाँ | 
पाप-कलुष हों नष्ट, ख़तम हो जाय भ्रांतियां...

"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर 

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दो और दो पांच का खेल, 
ताऊ, रामप्यारी और सतीश सक्सेना के बीच

रामप्यारी ने आजकल ताऊ टीवी का काम संभालना शुरू कर दिया है. उसी की पहल पर ब्लाग सेलेब्रीटीज से "दो और दो पांच" खेलने का यह प्रोग्राम शुरू किया गया है. दो और दो पांच में, ब्लॉग सेलिब्रिटी से निवेदन है कि वे सवाल के जवाब कुछ चटपटे रखें ताकि ब्लोगर साथियों का मनोरंजन भी हो , इस प्रोग्राम का मकसद आपको हंसना सिखाना है. इस मनोरंजक पोस्ट का अधिक अर्थ निकालने की कोशिश न करे यह काम रामप्यारे को ही करने दें. ...
ताऊ डाट इन पर ताऊ रामपुरिया 
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बापू तुम वापस आ जाओ
राष्ट्र-पिताजी आप स्वर्ग में,परियों के संग खेल रहे हैं | 
इधर आपके , चेले-चांटे ,अरब-खरब में खेल रहे हैं....
सृजन मंच ऑनलाइन पर DrRaaj saksena

--
फीकापन

एक लम्बी रात जो गुजरती है तुम्हारे ख्वाब में, 
तुम्हें निहारते हुए बतियाते हुए किस्से सुनते-सुनाते हुए ....
तिश्नगी पर आशीष नैथाऩी 'सलिल'
--
कुण्डली छंद ....श्याम लीला-- गोवर्धन धारण.... 

 *जल अति भारी बरसता वृन्दावन के धाम,* 
*हर वर्षा-ऋतु डूबते , वृन्दावन के ग्राम ...
सृजन मंच ऑनलाइन पर shyam Gupta
--
"हो गया है साफ अम्बर"

उमस ने सुख-चैन छीना,
हो गया दुश्वार जीना,
आ रहा फिर से पसीना, तन-बदन पर।
खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर...
"धरा के रंग"
--
इक सानिहा.....!
अज़ब इक सानिहा, 
इस शहर में हो गया नज़रें मिली और झुकी, 
दिल मेरा खो गया जाने कितने अब्र आये...
काव्य मंजूषा पर स्वप्न मञ्जूषा 

--
मित्रों...आज के लिए बस इतना ही...!
नमस्ते...
अगले मंगलवार को फिर मिलूँगा।

Monday, July 29, 2013

रंगबिरंगी गुज़ारिश :चर्चा मंच 1321

... शुभम दोस्तो ...
मैं 
ले आई हूँ आज 
जुलाई महीने के आखिरी सोमवार की 
आखिरी चर्चा 
''रंगबिरंगी गुज़ारिश ''
आपके अपने चर्चा मंच 1321
पर  
सावन का महीना रंगबिरंगी पतंग 
भरती हर मन में नई सी उमंग  
|
पतंगें थाम कर इठला रहा हूँ 
||
किसी को भी मिलो पहली बार 
या हो जाए प्यार करो इकरार 
|
सलमान रिज़वी आज़मी 
||
जो सुख छज्जू दे चुबारे 
ना बल्ख ना भुखारे 
|
वापिस अपने घर 
||
मांगना है तो उससे मांग जो है सबका वाली 
झोली तेरी कभी ना जाएगी तब खाली 
|
क्या आप एक भिखारी से बेहतर 
||
बन्दे काहे उलझे धर्म में 
ध्यान लगा ले अपना कर्म में  
|
मुस्लिम पी सी एस और आजम 
||
चलते चलते मेरे यह गीत याद रखना 
कभी अलविदा ना कहना 
|
भोजपुरी गीत 
||
रोको लम्बी टॉक 
करो नित मोर्निंग वाक 
|
मोर्निंग वाक ,अभिषेक गोस्वामी 
||
सबका ईश्वर एक है धर्म सभी का एक 
बेड़ा तेरा पार लगेगा काम अगर करे नेक 
|
धर्म संगम 
||
ना तेरा ना मेरा 
यह घर शिवालय सभी का 
|
मेरा घर 
||
कर्म का खाता खोल तू बन्दे 
ना कर उलटे सीधे धन्धे 
|
कर्मों का खाता 
||
तेरा मेरा रिश्ता पुराना है 
प्यार संग दर्द तो पाना है 
|
दर्द और मैं 
||
सावन का महीना पवन करे शोर 
घूमने चला मनु अब मंदिर की ओर 
|
शिकारी देवी मंदिर 
||
भरती हूँ चर्चा में आखिरी रंग 
सभी प्यारे दोस्तों के संग 
|
तेरी इन्हीं बातों ने 
||
बड़ों को नमस्कार 
छोटों को प्यार 
|
.. शुभविदा ..
=========
आगे देखिए.."मयंक का कोना"
(1)
“सरस्वती वन्दना” 

आपका ब्लॉग
मित्रों!
आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।
बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

आपका ब्लॉग
(2)
"लहलहाता हुआ वो चमन चाहिए"
मित्रों!आज अपने काव्य संकलन सुख का सूरज से
एक गीत पोस्ट कर रहा हूँ!"लहलहाता हुआ वो चमन चाहिए"
मन-सुमन हों खिलेउर से उर हों मिलेलहलहाता हुआ वो चमन चाहिए। ज्ञान-गंगा बहेशन्ति और सुख रहे- मुस्कराता हुआ वो वतन चाहिए।१।...सुख का सूरज
(3)
"कुण्डलियाँ-चीयर्स बालाएँ" 
(१)सुन्दरियाँ इठला रहीं, रन वर्षा के साथ।अंग प्रदर्शन कर रहीं, हिला-हिला कर हाथ।।..

(२)
आई कैसी सभ्यता, फैला कैसा रोग।
रँगे विदेशी रंग में, भारत के अब लोग।।..
सृजन मंच ऑनलाइन
(4)
"अब आ जाओ कृष्ण-कन्हैया"


रक्षक जब उत्पात मचाये! विपदाओं से कौन बचाये
आस लगाये यशोदा मइया! अब आ जाओ कृष्ण-कन्हैया!!
उच्चारण
(5)
सम्मान : क्या भूलूं क्या याद करुं ?

इस पोस्ट को लेकर मैं काफी उलझन में था। मैं समझ ही नहीं पा रहा हूं कि अपनी 200 वीं पोस्ट किस विषय पर लिखूं। वैसे तो आजकल सियासी गतिविधियां काफी तेज हैं, एक बार मन में आया कि क्यों न राजनीति पर ही बात करूं और देश की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस से पूछूं कि 2014 में आपका प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन है ? फिर मुझे लगा कि इन बेचारों के पास आखिर इसका क्या जवाब होगा ? क्यों मैं इन पर समय बर्बाद करूं...
आधा सच...पर महेन्द्र श्रीवास्तव 
(6)
कुल मकार मक्कार, नहीं मन मोदी रमता-
किस को करना है हिट किसको जाना है पिट मिलकर बतायें !सुशील
 
उल्लूक टाईम्सले दे के है इक शगल, टिप्पण का व्यापार |इक के बदले दो मिले, रविकर के दरबार |रविकर के दरबार, एक रूपये में मनभर |काटे पांच रसीद, खाय बारह में बब्बर |यहाँ बटें नि:शुल्क, नहीं ब्लॉगर को खेदे | दे दे दे दे राम, नहीं तो ले ले ले दे ||
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर

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