समर्थक

Saturday, August 31, 2013

स्लो कनक्शन से फटाफट चर्चा (चर्चा मंच-1354)

मित्रों!
कल से हमारे क्षेत्र का ब्रॉडबैंड बाधित है। मोबाइल सिम से प्रयास कर रहा हूँ फटाफट चर्चा लगाने की। देखिए कहाँ तक सफल हो पाता हूँ!

--
सत्यार्थमित्र पर सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 

--
काव्यान्जलि पर धीरेन्द्र सिंह भदौरिया

--

'कवरेज' (लघुकथा )

--
आधा सच...पर महेन्द्र श्रीवास्तव

--

--
नामुराद सांसें भी आईं कुछ इस तरह अहसान से आज चलते - 
चलते ज़िन्दगी जो उम्र का इक पन्ना फाड़ गई ….
--

--

--

--
वाग्वैभव पर vandana

--

--
Rhythm पर नीलिमा शर्मा

--
 नारी मुझको रोना आता तेरी इस लाचारी पर , कौन करेगा गर्व भला भारत की ऐसी नारी पर !! कोख में कन्या-भ्रूण है सुनकर मिलता आदेश मिटाने का , विद्रोह नहीं क्यूँ तू करती ?क्यूँ ममता तेरी जाती मर !!...
समाज पर Kartikey Raj 

--
जुम्मा जुम्मा आ कर अभी तो पाँव कुछ जमाई है कुछ बातें समझनी बहुत जरूरी होती हैं पता नहीं क्यों नहीं समझ पाई है पढी़ लिखी है और समझदार है दिखती मजबूत सी है बाहर से काम करने में भी काफी होशियार है पर हर जगह के अपने अपने कुछ उसूल होते हैं बहुत से लोग होते हैं जो बहुत पुराने हो चुके...

--
 अ -युक्त मनुष्य के अंत :करण में न ईश्वर का ज्ञान होता है ,न ईश्वर की भावना ही। भावना हीन मनुष्य को शान्ति नहीं मिलती और अशांत मनुष्य को सुख कहाँ ?...
आपका ब्लॉग पर Virendra Kumar Sharma

--

--
(1) लोकतंत्र की शक्ल में, दिखने लगी चुड़ैल | परियों सा लेकर फिरे, पर मिजाज यह बैल | पर मिजाज यह बैल, भेद हैं कितने सारे | वंश भतीजा वाद, प्रान्त भाषा संहारे | जाति धर्म को वोट, जीत षड्यंत्र मन्त्र की | अक्षम विषम निहार, परिस्थिति लोकतंत्र की |...

--
१ श्री कृष्ण नाम है आनंद की अनुभूति का, प्रेम के प्रतिक का , ज्ञान के सागर का और जीवन की पूर्णता का। २ श्री कृष्ण ने गीता में दिया है निति नियमो का ज्ञान जीवन को जीने का सार , पर इस युग में तो मानव ने राहों में रोप दिए है क्षुद्रता के कंटीले तार।....
sapne(सपने) पर shashi purwar 

--
ख्बाब था मेहनत के बल पर , हम बदल डालेंगे किस्मत ख्बाब केवल ख्बाब बनकर, अब हमारे रह गए हैं ...
आपका ब्लॉग पर मदन मोहन सक्सेना 

--
Computer Tips & Tricks पर Faiyaz Ahmad

--

--
MY BIG GUIDE पर Abhimanyu Bhardwaj

--
अटकल दुश्मन लें लगा, है चुनाव आसन्न | बुरे दौर से गुजरती, सत्ता बांटे अन्न | सत्ता बाँटे अन्न, पकड़ते हैं आतंकी | आये दाउद हाथ, होय फिर सत्ता पक्की | हो जाए कल्याण, अभी तक टुंडा-भटकल | पकड़ेंगे कुछ मगर, लगाते रविकर अटकल ...

--
.. मुझे विश्वास है यह पृथ्वी रहेगी यदि और कहीं नहीं तो मेरी हड्डियों में यह रहेगी जैसे पेड़ के तने में रहते हैं दीमक जैसे दाने में रह लेता है घुन यह रहेगी प्रलय के बाद भी मेरे अन्दर यदि और कहीं नहीं तो मेरी ज़बान और मेरी नश्वरता में यह रहेगी और एक सुबह मैं उठूंगा मैं उठूंगा पृथ्वी-समेत जल और कच्छप-समेत मैं उठूंगा मैं उठूंगा और चल दूंगा उससे मिलने जिससे वादा है कि मिलूंगा...
हम और हमारी लेखनी पर गीता पंडित 

--
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर

--
आपका ब्लॉग पर Virendra Kumar Sharma

--
क्या बने बात जहां बात बनाये न बने |
 यार है यार बना साथ मुलाकात रहे
 कब रहे यार अगर साथ निभाए न बने |...
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 

--
मित्रों आज के लिए बस इतना ही...
नमस्ते..!

Friday, August 30, 2013

राज कोई खुला या खुली बात की : चर्चा मंच 1353

आज ही होनी थी गड़बड़ी
मेरे कम्प्यूटर में
फिर भी कुछ तो हासिल करूँगी ही
चलिये देखें क्या है आज....


बात बिन बात की ,या बात थी बात की |
राज कोई खुला या खुली बात की ||


नन्द दुलारे यशोदा के प्यारे
सांवरे सलोने हे कृष्णा।


तैयार हुआ हिंदू विश्वकोश
दुनिया के सबसे प्रमुख धर्मों में से एक हिंदू धर्म के विश्वकोश का
अगले हफ्ते साउथ कैरोलिना में लोकार्पण होगा।
यह अंग्रेजी में है। हिंदुवाद और इसके अनुशीलन से 
संबंधित इसमें करीब 7000 लेख हैं। 


हदों में रहने वाले सरहदों की हदों से हैरान
हद फिर भी मिटती नहीं सरहदों की हदों पर।



राह में किसी घायल से कतरा के निकल जाने वाले ,
अब नहीं मिलते उन्हें अस्पताल पहुँचाने वाले .


कान्हा - रास नहीं अब समर चाहिये
इस बार सिखाओ कान्हा फिर,
भारत को एक और समर,
भूखों को अब भीख नहीं,
हक़ चहिये इस बार मगर।


धमनियों में बहती
भावनाओं की तरह,
नश्वर जीवन की
श्वास की तरह,


मेरो लड्डू गोपाल
कृष्ण अब लो, तुम अवतार,
मचा फ़िर से है, हाहाकार ।


बरसों की
प्रतीक्षा पूरी हो गयी
आज वकील की
चिट्ठी आ गयी



यदि मूर्खों से पाला पड़ जाए तो क्या करना चाहिये
हुजूर सरकार चुप रहना चाहिये



छलक जाते हैं अब आँसू, ग़ज़ल को गुनगुनाने में।
नही है चैन और आराम, इस जालिम जमाने में।।


तमाम उम्र मेरी ज़िंदगी से कुछ न हुआ
हुआ अगर भी तो मेरी ख़ुशी से कुछ न हुआ


फि‍र बीती एक रात
ध्रुव तारे से आंख मि‍लाते
चांद को बादलों तले
देखते ही देखते छुप जाते


रिश्ते कैसे कैसे
कितने बने कितने बिगड़े
कभी विचार करना
कब कहाँ किससे मिले
उन्हें याद करना 



आज के लिये बस इतना ही
आज्ञा दीजिये यशोदा को

जारी है मयंक दा का कोना
--
नवगीत की पाठशाला की रचनाओं का पहला संकलन

नवगीत की पाठशाला

--
तन्वी श्यामा शिखरि दशना पक्व बिम्बाधरोष्ठी मध्ये 
क्षामा चकित हरिणी प्रेक्षणा निम्ननाभि।

--
जगत मातु पितु सम्भु भवानी , 
तेहिं श्रृंगार न कहहु बखानी।
आपका ब्लॉग पर Virendra Kumar Sharma
--
हुआ यूं कि ---

मनोज

--
"सम्बन्ध" 
काव्य संकलन सुख का सूरज से
एक गीत
"सम्बन्ध"
सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं।
अनुबन्ध आज सारे, बाजार हो गये हैं।।

न वो प्यार चाहता है, न दुलार चाहता है,
जीवित पिता से पुत्र, अब अधिकार चाहता है,
सब टूटते बिखरते, परिवार हो गये हैं।
सम्बन्ध आज सारे, व्यापार हो गये हैं।।...
सुख का सूरज
--
भक्त और वोट
सरोकार
सरोकार पर अरुण चन्द्र रॉय

--
हां मैं दे रहा हूं "सत्याग्रह" को फुल मार्क्स !

TV स्टेशन ...पर  महेन्द्र श्रीवास्तव 

--
हम आपकी नज़रों में जीते हैं....अस्तित्व "अंकुर"

मेरी धरोहर पर yashoda agrawal

--
उल्लूक की पोटली में कूड़ा ही कूड़ा
हवा में तैरती ही हैं 
हर वक्त कथा कहानी कविताऎं 
जरूरी कहाँ होता है 
सब की नजर में सब के सब ऎसे ही आ ही जायें 
सबको पसंद आ जायें शैतानियाँ ....
उल्लूक टाईम्स पर Sushil Kumar Joshi 

--
अर्चना भैंसारे- कुछ कवितायें, आत्मकथ्य और एक नोट

*हिंदी के लिए इस वर्ष का साहित्य अकादमी युवा सम्मान प्राप्त करने वाली 
कवयित्री अर्चना भैंसारे को इस सम्मान के लिए हार्दिक बधाई देते 
हुए आज असुविधा की यह पोस्ट उन पर केन्द्रित की गयी है.
 आभासीय दुनिया में लोकप्रियता की जद्दोजहद के बीच, 
यह एक सहज काव्‍य यात्रा का ईनाम है ...
असुविधा....
--
शांत रस रौद्र में प्रचंड हो बदल रहा !

WORLD's WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION

Thursday, August 29, 2013

कृष्णमयी चर्चा ( चर्चा - 1352 )

 चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है 
आज जन्माष्टमी के पर्व पर चर्चा तैयार कर रहा हूँ , और मेरी शुभकामनाएँ देरी से आप तक पहुंचेगी फिर भी चर्चा मंच के सभी पाठकों को कृष्ण जन्म की हार्दिक शुभकामनाएं 
चलते हैं चर्चा की ओर
 
मेरा फोटो
मेरा फोटो
धन्यवाद 
"मयंक का कोना" अद्यतन लिंक
--
सुर्खियों से दूर रहे स्वातंत्र्यवीर : श्री मांगीलाल गुहे

मिसफिट Misfit

--
मोबाइल ऐप्स डाउनलोडिंग बन सकती है मुसीबत

तकनीक शिक्षा हब पर Lalit Chahar

--
प्यारा प्यारा कान्हा 

आप सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें...
चैतन्य का कोना
--
मंजिल..' 

"कभी-कभी बहुत लम्बी हो जातीं हैं राहें..मंजिल बारहां रूह से टंगी रहती है..!!...
प्रियंकाभिलाषी..
--
YE BHI KOI AANA HUA KANHA ..

Hasya Kavi Albela Khatri

--
दिखती कोई राह नहीं...! 
कौन करे अब पहले की बातें, जब वहाँ तक जाती दिखती कोई राह नहीं... 
कौन पाले उड़ जाने के सपने, जब बंध कर रह जाना है यहीं कहीं.....
अनुशील

LinkWithin