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Friday, December 31, 2010

अलविदा २०१०.. स्वागतम् २०११ - डॉ नूतन गैरोला (चर्चा मंच 385 )

जाने वाले जो अच्छा दिया तुने उसे गुन लिया मैंने
जो बुरा था, वो भला था उससे सबक लिया मैंने |
आने वाला तू अपनी झोली में भरभर खुशहाली लाएगा,
इसी विश्वास के संग तेरा स्वागत किया है मैंने |
हम ना रहे इतने स्वार्थ भरे कि बस तू हमें देता जायेगा.
हम भी कुछ भला निस्वार्थकर्म कर ऐ वर्ष तुझे देते जायेंगे||
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मित्रों !
आज साल २०१० की आखिरी चर्चा है |
मैं संपूर्ण दिसम्बर में कई कार्यों से बाहर रही
अतः अंतरजाल की दुनिया से दूर हो गयी व ब्लॉग की हलचल
और चर्चाओं रचनाओं से दूर थी|
आज ही पहुंची हूँ ..प्रार्थना करती हूँ कि
आप सभी को मैं अच्छे लिंक्स प्रदान कर पाऊं |
आओ इस २०१० को जिसने हमारा अनुभव बढ़ाया
उसे प्रेम पूर्वक विदाई देते हुए-
नव वर्ष का अभिनन्दन करें |

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*आप सभी को नववर्ष २
००११ के आगमन **की **हार्दिक शुभकामनाएँ.....!!!!* * *
शिवस्वरोदय-24 आचार्य परशुराम राय शिवस्वरोदय के इस अंक में इडा नाड़ी के प्रवाह-काल में किए जाने वाले कार्यों का विवरण दिया जा रहा है। समझने की सुविधा...
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शिवस्वरोदय-24 - शिवस्वरोदय-24 आचार्य परशुराम राय शिवस्वरोदय के इस अंक में इडा नाड़ी के प्रवाह-काल में किए जाने वाले कार्यों का विवरण दिया जा रहा है। समझने की सुविधा...---------------




- साथियों देखते ही देखते पुराना वर्ष चला गया और नया वर्ष

नयी उमंगों और आशाओं को साथ लिए आ गया ।

इस नए वर्ष का स्वागत मैं गए वर्ष के कुछ हसीन पलों को या...
देश -विदेश में इस बार २०१० में क्या कुछ खास अच्छा या बुरा हुवा - देखिये
विश्व पर एक नजरिया २०१० – विकिपीडिया
glob9
भारत में सन् २०१० में घटी घटनाएँ

india
भारत के ३८ गोल्ड मेडल विजेता - कॉमन वेल्थ गेम के
commonwealth-games-logo


बीत रहा .......
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अलविदा २०१० .. स्वागत २०११
किससे गिला..किससे और कैसी उम्मीदें ...इर्द-गिर्द से

बाय बाय २०१० ..हमको तो बिछड़ते हुवे साल की याद सताती है
क्यों करते है स्वागत लोग
नव किसलय नव पल्लव की

पीड़ा गत वर्ष की
गत वर्ष जाते -जाते
नव वर्ष के कान में
अपनी पीड़ा यूँ कह गया
happy-new-year

वंदना जी की २०० वीं पोस्ट….लम्हों की कहानी सदियों की जुबानी
कल तेरे शहर की हवा ने , दस्तक दी मेरे दरवाजे पे….
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नव वर्ष की बधाई !!- Powered by SantaBanta.com paly पर क्लिक करें
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- गत वर्ष जाते -जाते
नव वर्ष के कान में
अपनी पीड़ा यूँ कह गया
कि आज तुम्हारा स्वागत हो रहा है
तो इतराओ मत
मैं भी पिछले साल यूँ ही इतराया था और खुद को य...
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- एक वर्ष और बीत गया , कुछ भी नया नहीं हुआ ,
हर बार की तरह इस वर्ष भी , नया साल मनाया था ,
रंगारंग कार्यक्रमों से सजाया था ,
खुशियाँ बांटी थीं सब को , कठिन स्थ...
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पापा, कैसे करूँ पढ़ाई? ----- सूर्य निकलने से पहले ही...

आईये गजरेला ( गाजर का हलवा) बनाये ओर फ़िर खाये....
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जाते जाते साल के एक अंतिम प्रश्‍न हिन्‍दी ब्‍लॉगरों से ?????




नव वर्ष कुछ तैयारी-कुछ बिखरे चित्र --रफत आलाम
रफत आलम साहेब की दिल को छूती रचना ..दस्ताकार से

नया साल कब आएगा
बब्बन पांडे जी कहते है…

रिल्के - एक जीवन दर्शन
मौलश्री में अपर्णा जी की पोस्ट पत्र -४

मैं intelligent हो गयी हूँ | लता “हया” जी हया में कहती हैं



इट हेप्पेंस ओनली इन इंडिया
दुनाली में

इस बार क्रिसमस में बच्चों के बाल चर्चामंच पर चर्चा चली Merry Christmas

देवी नागरानी की दो ग़ज़लें
रचनाकार में

बोलें तो बिंदास से कानपुर यात्रा पुराण- ३ छात्रों की मज़बूरी और चांदी कूटते लोग |

कुछ क्षणिकाएं देवेंदर कुमार शर्मा जी की लिखी हुवी ..वटवृक्ष में रश्मि प्रभा जी की पोस्ट..


My Poetry Collection से अनीता जी कहती हैं कि देखो उसने पुनः पुकारा

मैं और मेरी तन्हाई से Let me go.

We even cry the same way से बुद्धा कहते हैं Another Shot I Guess

जिन बच्चों को झूठ सिखाया जाता है उनकी नस्ल हिंसक होती है - भगवान बुद्ध !
गोदियाल जी की पोस्ट अंधड़ से


आदत मुस्कुराने की में एक अनाथ का दर्द
वंदना गुप्ता जी की लिखी कविता जो संजय भास्कर जी ने अपने ब्लॉग में
पुनः पोस्ट की |


चिंतन मेरे मन का में
प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल जी आग के बारे
में कहते है
-- कभी आस है आग, तो कभी विनाश है आग
, कभी दाह है आग,तो कभी प्रकाश हैआग
वहीं शान्नो अग्रवाल जी ओंस में मानव और दिए की तुलना करती
हुवी लिखती है मानव दीप


असगर वजाहत का एक संस्मरण - फैज पर कुछ अलग ढंग से
मेरी लेखनी मेरे विचार में
जोगी भाई कहते है
क्यूं आज भी ..?


TSALIIM में जाकिर जी कहते हैं कि
विज्ञान कथा और परी कथा का सम्मुचय हो रहा है ..
लेखक डॉ अरुणा कपूर जी की पुस्तक
“उनकी नजर है हम पर” पुस्तक पर विचार

उर्मी चक्रवर्ती जी लिखती है
काश ये दिल उदास ना होता”|



Democracy Don't rule the world बेतागवानी में
गीत चतुर्वेदी जी की पोस्ट | भारत भारती वैभवं में कहा गया
पाँव की संख्या से निर्धारित
तरह तरह की वृत्तियाँ उड़न तस्तरी से श्री समीर लाल जी की पोस्ट केक्टस

जाते वर्ष की एक पोस्ट देश के नौनिहालों के नाम डॉ दिव्या श्रीवास्तव

जाते जाते साल का एक अंतिम प्रश्न हिंदी ब्लोगर्सो से
नुक्कड़ से ये प्रश्न उठा |


आते जाते नए पुराने सालो में ना तुम बदले ना हम अमृतरस से स्वयं मैं
डॉ नूतन गैरोला
long-friends

नवप्रभात सुखद रहे !.. अनुशील से अनुपमा पाठक जी की शुभकामना |

नव वर्ष पर हादिक शुभकामनाएं Happy New Year 2011
मेरु पहाड़ प्यारु बटी रेबार .. विनोद जेठुडी जी कहते है |

शुभकामनायें आपको My~Life~Scan से -
शुभकामनाएं तो शुभकामनाएँ है
जन्मदिन में दो या नववर्ष या किसी भी उपलक्ष में ..
मेरी आप सभी के लिए शुभकामनायें



नवप्रभात का उगता सूरज दुनियावालों से कहता है
कर दूँगा रौशन जग सारा डॉ रूपचन्द्र शास्त्री जी की पोस्ट
एक इच्छा है, एक कामना है, एक आशा है, एक विश्वास है, एक दुवा है
हम और हम सबका आने वाला साल शुभ और मंगलमयी हो खुशियों से भरा हो |
हम खुद में निहित बुराइयों को बाय बाय कह सकें और अच्छे गुणों का स्वागत करें
उन्हें अपना सकें और अमल में लाएं |
हमारा घर, परिवार, मित्र, समाज, देश, दुनिया हर जगह खुशिया हो
सभी सुरक्षित स्वस्थ हो |
मंगलकामनाये |
सन २०१० की इस अंतिम चर्चा के साथ २०१० को भावभीनी विदाई और
नए साल २०११ का हर्षोल्लास के साथ स्वागत…. मिलतें है पुनः नए साल में ..
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नूतन वर्ष की मंगलकामनाएं
चर्चाकार डॉ. नूतन गैरोला

Thursday, December 30, 2010

बच के रहना रे बाबा………… चर्चा मंच (384 )

 दोस्तों ,
लीजिये इस साल की आखिरी चर्चा लेकर हाजिर हूँ आपके सामने............अब तो अगले साल में ही मिलेंगे ना मुझसे तो ..........तो चलिए देखिये आपकी पसंद के लिंक्स आपका इंतज़ार कर रहे हैं ...........

तो तुम्हे ख़त लिखूं.........
हाँ उसी का तो इंतज़ार है मगर कशमकश में हूँ कि क्या लिखूं


जय हो महाराज


ममता बनर्जी को मिथ बनाने की आदत है वह उनमें जीती हैं। ममता बनर्जी निर्मित पहला मिथ है माकपा शैतान है। दूसरा मिथ है मैं तारणहार हूँ। तीसरा मिथ है माओवादी हमारे बंधु हैं। चौ�...
नए वर्ष पर 
 
 अभी देते हैं जी ...........यही तो फ़ोकट में हैं हमारे पास

आंसू की जुबां
किसने जानी ?
कौन ?

अरे बाबा सब झोलम-झोल

  बिल्कुल जी बहुत गड़बड़ घोटाला है 


'सरदारों' में असरदार कौन...खुशदीप

Computer Duniya 
 अजब गजब 

कविता : एक नया साल दुनिया के लिये

 सच ..............


तुम कहाँ हो ? ? ?
तुम्हारे पास ही तो ...........अपने ख्यालों को झटक कर तो देखो 
 
*** आशा की डोर ****
बनी रहे ...........जब तक ज़िन्दगी रहे

बात तो लाख टके  की कही है
जरूर लिखिए ...........

इकरार करो...............
 क्यूँ ? क्या बिना इकरार के मोहब्बत मोहब्बत ना होगी ...............

लम्हों की कहानी सदियों की जुबानी हो जाये ..............200 वी पोस्ट 
ये भी पढ़ ही लीजिये शायद कोई दास्ताँ आपकी ही हो इसमें 


ये तो गज़ब रहा ..................

तड़प, उत्साह, प्रश्न, निष्कर्ष और लेखन

एक अलग अनुभूति ....................
किसी परिचय के मोहताज नहीं
किसके लिए ?

इस सुबह को गौर से देखो
क्या है इसमें नया बताइए ज़रा ...........
सच कहा .................
यही तो है ज़िंदगी ...........

मेरे प्रेम करने से पहले.....
बहुत कुछ था जो मैं ना देख पाया


जरूरी है  ये भी 
ज़िन्दगी और क्या है इसके सिवा

कुछ उम्दा कविताएँ 
 ज़िन्दगी के कडवे सच 

बदन...क्या कहे!!!
जो कहता है कोई समझ नही पाता


आहट प्रेम की , मृत्यु की और ईश्वर की ..
सम्पूर्णता की चाह मे छुपा अदृश्य संसार

उस गुलमोहर के तले.....
हम क्या कहें .........खुद ही पढ़ लीजिये 

ऐसी जिद तो करनी ही चाहिए 


आतंरिक निष्ठायें ही व्यवहार और आचरण का मूल आधार होती हैं .... 
 सत्य वचन 

कैलेण्डर 
तारीखो के साथ भावनाओ का आदान प्रदान

मंडे की मंडी पर मंदी की मार--- 
बच के रहना रे बाबा…………

अलविदा ! वर्ष २०१०
सुस्वागतम !आने वाले कल का

क्यूंकि वह वहसी दरिंदा था
मार्मिक घटना की भर्तस्ना...........


"मिक्की माउस" 

*मिक्की माउस कितना अच्छा।


आओ खेलें विधा विधा --
सुधरा हुआ हास-परिहास......


एक किरण! 
जिसका हमें भी इन्तजार है......


"कर दूँगा रौशन जग सारा" 
*मैं नये साल का सूरज हूँ,* *हरने आया हूँ अँधियारा.....


मो सम कौन???? 
कोई तो है!!!


धन्यवाद २०१० बहुत बहुत धन्यवाद ....


शुक्रिया.... 


अच्छा दोस्तों अब अगले साल मिलेंगे ..........नयी हवाओं में, नयी फिजाओं में , नए रंग में , नए ढंग में ...........तब तक आप नए साल के आगमन की तैयारी कीजिये .............नव वर्ष आप सबके जीवन में सुख और समृद्धि  लाये ...........इसी कामना के साथ दीजिये इजाज़त!
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आशा ही नहीं विश्वास भी है कि 
वर्षान्त की कल की चर्चा 
"डॉ.नूतन गैरौला" जी की होगी!

"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...